HOW TO BUY PLOT AND AWARE WITH BUYING PROCESS (HINDI)

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HOW TO BUY PLOT AND AWARE WITH BUYING PROCESS (HINDI)
प्लाट कैसे ख़रीदे एवं क्या सावधानी बरते?

पिछले article में हमने प्लाट खरीदने के advantage और risk की बात की है. तो हम देखेंगे कि step-by-step प्लाट कैसे ख़रीदे और उसकी पूरी process के बारे में जानकारी लेंगे. प्लाट खरीदते समय निम्नलिखित बातो का ध्यान एवं सावधानी रखेंगे तो आप बहुत अच्छा निवेश कर पाएंगे. तो चलिए जानते है प्लाट कैसे ख़रीदे:

  1. Investment Research:

    सबसे पहला step आता है investment research का.

    a) Investment Horizon – At List 5 Years:

    तो आप प्लाट में निवेश करना चाहते है तो आपको अपना investment Horizon निवेश करने की अवधि निर्धारित कर लेनी चाहिए की आप कम से कम कितने समय के लिए निवेश करके रखेंगे. आपको कमसे कम 5 साल horizon लेके चलना पड़ता है तब ही ठीक से return निकलके आते है.

    b) Budget:

    दूसरा पॉइंट होता है की आपको बजट बना लेना चाहिए की आप किस कीमत तक प्लाट खरीद सकते है. Commercial प्लाट थोड़े महेंगे होते है तो Residential प्लाट सस्ता पड़ता है. तो आपका budget जैसा है उसमे invest कर सकते है.

    c) Look for areas with Infrastructure and near Economic Growth Center:

    आप किस जगह निवेश करना चाहते ये समज ले. यह बहुत जरुरी होता है आप ऐसी जगह पर invest करे जहा पर Industrial area हो या कोई Economic Growth हो उसके 10-20 km के अन्दर ही निवेश करे तब ही आपको अच्छे returns मिलेंगे. हो सकता है आप जिस जगह पर invest करना चाहते है वहा पर कोई development ना हो तो returns आने में काफी समय लग जाता है.

    d) Study News & Market Trends:

    उसके बाद आप study करिए, News Items पढ़िए, Market Trends देखिये की कोनसे एरिया में कंपनी आ रही है, तो आपको पता लग जायेगा की कोनसी जगह पर आपको निवेश करना है.

  2. Property Search:

    प्लाट हो या कोई भी प्रॉपर्टी आप निम्नलिखित तरीके से ढूंड सकते है.

    a) Online/Broker:

    या तो आप online search कर सकते है. जैसे हमारे वेबसाइट estatelive.in पे अपनी मनपसंद एरिया में अपने budget में अपनी प्रॉपर्टी आसानी से ढूंड सकते है. या और भी ऑनलाइन sites में ढूंड सकते है. या फिर हमे फ़ोन (744 7200 894) करके भी आप अपने लिए प्रोपटी पता कर सकते है. या फिर उस एरिया के किसी भी ब्रोकर को आप संपर्क कर सकते है.

    b) Compare Properties and Prices:

    आप प्रॉपर्टी की सही कीमत ही अदा करे इसके लिए आपको प्रॉपर्टी को दुसरे प्रॉपर्टी से compare कर लेना चाहिए. कम से कम 3-4 प्रोजेक्ट्स की study कर ले उसके बाद ही प्लाट ख़रीदे.

    c) Connectivity – Road, Bus Stop, Proximity to Industrial Corridors: Connectivity

    आपको जरुर देख लेनी चाहिए की वहा पर जाने की रास्ता, बस स्टॉप, मार्केट, industrial कोरिडोर नजदीक होनी चाहिए, ऐसी जगह पर अच्छा appreciation मिलता है. बड़े चौढ़े रोड हो या commercial एरिया वाह पर भी आपको अच्छी कीमत मिल जाती है.

    d) Premium Location – Main Road, 2-Side/3-Side Open, Vastu:

    Premium लोकेशन आप चुनेंगे तो अच्छा है. अगर आप भविष्य में बेचना चाहे तो प्रीमियम लोकेशन वाले प्लाट जल्दी बिक जाते है. प्रीमियम प्लाट के खरीददार आपको जादा मिलते है. जो प्लाट 2-3 sides से खुला है उसकी कीमत जादा होती है. वास्तु के हिसाब से उत्तर या पूर्व (North/East) जो प्लाट होते है वो हमेशा अच्छे बिक जाते है. तो इन बतोका भी ध्यान रखे प्रॉपर्टी सर्च करते समय.

  3. Due Diligence and Document Check:

    आप किसीभी प्रॉपर्टी का बैकग्राउंड कैसे चेक करेंगे ये भी बहुत जरुरी होता है.

    a) Physical Survey – Area of Plot Encroachments:

    प्लाट का physical survey कर ले, प्लाट का एरिया टेप से measure करवा ले और ये सुनिश्चित करा ले की जितना एरिया बेचवाल buyer ने बोला है वह है की नही. साथ ही साथ Encroachment चेक करले की कोई अतिक्रमण तो नही है, आजू बाजु वाले ने कोई boundary आपके प्लाट में तो नही बना ली है या कोई और ने तो possession नही ले लिया है. काफी लोग प्लाट को किराये पर दे देते है, तो कही उसने तो कब्ज़ा नही कर लिया. इन बातो का ख्याल रखना आपके लिए बहुत जरुरी है.

    b) Clear Title and No Encumbrances:

    आप यह भी चेक कर ले की वह प्लाट clear title है की नही और कोई Encumbrances तो नही है. इस पर हमने पहले के आर्टिकल में बताया है. आप वह भी चेक कर सकते है. जो प्रॉपर्टी का मालिक है वह सहीमे प्रॉपर्टी का मालिक है की नही यह भी जानना जरुरी होता है. यह भी आप ऑनलाइन जान सकते है. (यह article चेक पढ़े – How to know name of real land owner).

    i) Government Schemes – No Risk Title:

    अगर आप गवर्मेंट से प्लाट ले रहे है तो पहलेसे ही clear title होता है. उसमे कोई भी risk नही होती है.

    ii) Private Developer:

    अगर प्राइवेट डेवलपर की बात करे तो इसमें title की risk होती है. आप ऑनलाइन land records चेक कर सकते है. land records हम अलग अलग राज्योमे अलग अलग नामोसे जानते है. उत्तर भारत में इसे जमाबंदी, खाता, खतोनी, खतियान इन नामोसे जानते है तो महाराष्ट्र और गुजरात में 7/12 बोलते है. और दक्षिण भारत में पाहानी, अडंगल, तमिलनाडु में पट्टा-चिट्टा बोलते है. तो यह land records आप ऑनलाइन चेक कर सकते है. उसके बाद यह भी जान ले की डेवलपर ने CLU – Change Land Use certificate लिया है की नही. साथ ही साथ zone भी देख ले की वह प्लाट residential zone में ही आता है की नही.

    iii) Private Individuals:

    आप अगर किसी व्यक्ति से भी अगर खरीद रहे है तो उसमे भी title risk, CLU, Zone का risk हो सकता है. इसलिए यह बहुत जरुरी है की यह सारी बाते समझ ले. इस पर भी आर्टिकल बना है आप वह भी पढ़ सकते है (Advantage & Disadvantage of Buying Plot).

  4. Negotiation & Agreement of Sale:

    उसके बात आता है आपका Negotiation और Agreement of sale.

    a) Negotiate – Right Land Value:

    आप प्लाट के जादा पैसे नही देना चाहेंगे इसलिए आप दूसरी प्रॉपर्टी से compare करके सही कीमत पे deal करे. आप पता करिए की आजू बाजु में क्या रेट से प्लाट बिक रहे है उसके हिसाब से ही आप negotiate करे.

    b) Pay Advance (Generally 10% of Agreed Price):

    एकबार आपने negotiate कर लिया, प्रॉपर्टी पसंद कर ली, बैकग्राउंड चेक कर लिए आप deal final करना चाहते है तो आप एडवांस देंगे. Advance में आप आम तौर पर agreed amount का 10% देते है. 10% देना जरुरी नही है पर यह मार्केट practice है 10% एडवांस लिया जाता है.

    c) Agreement for Sale – Detailed Terms, Agreed Price Payment Terms, Default Penalty:

    एडवांस देने के बाद अग्रीमेंट sign करेंगे. Agreement for Sale के अन्दर सारी details terms और payment terms लिखी जाती है. इसमें आपको अक्सर 2-3 महीने का समय मिलता है. आपने कितने पर deal final किये हो वो सारी चीजे लिखी जाती है. खरीददार और बेचवाल का नाम लिखा जाता है. प्रॉपर्टी की डिटेल्स और address लिखा जाता है. उसीके साथ डिफ़ॉल्ट पेनल्टी (Default Penalty) भी लिखी जाती है. अगर मान लीजिये buyer या seller कोई भी default करता है तो किसको कितनी पेनल्टी लगेगी. तो आम तौर पर buyer default करता है तो 10% advance जब्त (forfeited) होता है. और अगर seller default होता है उसमे advance का double देना होता है. तो 10% की जगह 20% वापस देगा buyer को. तो इस तरीके से सारे terms Agreement for Sale में लिखे जाते है.

  5. Sale Deed:

    अग्रीमेंट के बाद हमे sale deed sign करना होता है. sale deed बहुत जरुरी दस्तावेज होते है.

    a) Complete Payment in 2-3 Months:

    जब आप पूरी payment 2-3 महीने बाद पूरी कर लिए होते है तो आपको sale deed register करनी होती है. sale deed registrar office में register की जाती है.

    b) Pay Stamp Duty & Registration Charges:

    आपको स्टाम्प ड्यूटी pay करनी होती है जो की प्रॉपर्टी के कीमत की 4% से 10% तक होती है. हर राज्य में इसके charges अलग अलग होते है. आप अपने राज्य में इसका पता कर सकते है.

    c) Sale Deed to be Registered at Sub-Registrar Office:

    स्टाम्प ड्यूटी भरने की बाद आपको sale deed sub-registrar office में register करनी होती है.

    6) Mutation (if required):

    सबसे आखरी step होता है mutation फेरफार करना. mutation 2 तरीके की होती है. अगर आपकी प्रोपटी नगर परिषद् के बहार ग्रामीण में आती है तो आपको land records के अन्दर (पटवारी/तलाठी कार्यालय) में अपना नाम बदलना होता है. अगर आपका प्लाट नगर परिषद् में आता है तो आप property tax में अपना नाम बदलना होता है उसको भी हम mutation ही बोलते है. तो यह आपका आखरी process होता है.

इस तरीके से आप प्लाट खरीद सकते है, हमने प्लाट खरीदने के सम्बन्ध सारी बाते करली की क्या advantage है, किस तरीके के risk होते है और तरीके से step-by-step आप documents चेक कर सकते है.

यह आर्टिकल आपको कैसा लगा या अपने कुछ सुझाव कृपया हमे कमेंट करके बता सकते है. हमसे उही जुड़े रहें, EstateLive ऐसे ही प्रॉपर्टी से सन्दर्भ में जरुरी जानकारी से अवगत करता है.

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